देवबंद विधानसभा: अबकी बार किसका होगा बेड़ा पार?
क्या बीजेपी लगाएगी हैट्रिक या बदलेगा सियासी समीकरण?

देवबंद विधानसभा: अबकी बार किसका होगा बेड़ा पार?
क्या बीजेपी लगाएगी हैट्रिक या बदलेगा सियासी समीकरण?
*देवबंद/विशेष रिपोर्ट*
उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल देवबंद पर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जैसे-जैसे चुनाव करीब आएंगे, सबसे बड़ा सवाल यही होगा—क्या भाजपा लगातार तीसरी बार जीत का परचम लहराएगी, या विपक्ष सत्ता की राह रोक देगा?
देवबंद का चुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जाता, बल्कि इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण संकेतक भी माना जाता है।
क्या कह रहे हैं सियासी संकेत?
सूत्रों के अनुसार भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन और जनप्रतिनिधियों को लेकर लगातार समीक्षा कर रही है। पार्टी क्षेत्र में फीडबैक और संगठनात्मक मजबूती पर विशेष ध्यान दे रही है।
दूसरी ओर विपक्ष भी देवबंद को प्रतिष्ठा की सीट मानकर पूरी ताकत लगाने की तैयारी में है। ऐसे में मुकाबला पहले से अधिक दिलचस्प होने की संभावना है।
इस बार चुनाव किन मुद्दों पर?
सड़क, बिजली और पानी रोजगार और उद्योगकिसानों की समस्याएं, कानून व्यवस्था
स्थानीय विकास कार्य, जनप्रतिनिधियों की जनता के बीच सक्रियता बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।
अगर भाजपा को यहां हैट्रिक बनानी है तो उसे केवल अपने पारंपरिक वोट बैंक पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि नाराज कार्यकर्ताओं को साथ लाना, स्थानीय असंतोष कम करना और विकास के मुद्दे को मजबूती से जनता तक पहुंचाना होगा।
विपक्ष की उम्मीद
विपक्ष की रणनीति सत्ता विरोधी माहौल, स्थानीय मुद्दों और सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने की रहेगी। यदि विपक्ष एकजुट रहता है तो मुकाबला कड़ा हो सकता है।
रिपोर्ट प्रशांत त्यागी




