
नागल में गांव की चौपाल तक पहुंचा नशे का जहर!
शिकायत के बाद भी कब जागेगा प्रशासन?
एक परिवार की पुकार बनी पूरे गांव की आवाज
नागल (सहारनपुर)।
नागल क्षेत्र के गांव पांडोली से सामने आई एक शिकायत ने ग्रामीण इलाकों में फैल रहे कथित नशे के कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि गांव में अवैध रूप से देशी शराब और स्मैक की बिक्री हो रही है, जिससे न केवल एक परिवार बिखरने की कगार पर पहुंच गया है बल्कि युवाओं का भविष्य भी नशे की गिरफ्त में जाता दिखाई दे रहा है।
गांव निवासी बीरिन ने थाना नागल में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि गांव के दो लोग कथित रूप से अवैध शराब और स्मैक के कारोबार में लिप्त हैं। उनका कहना है कि नशे की आसान उपलब्धता के कारण कई युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो चोरी, मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि शिकायतकर्ता ने बताया है कि उसके पिता कथित रूप से शराब की लत के शिकार हो चुके हैं। आरोप है कि नशे की हालत में वे घर लौटकर आए दिन गाली-गलौज, मारपीट और अभद्र व्यवहार करते हैं, जिससे पूरा परिवार मानसिक और सामाजिक संकट झेल रहा है। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि जब उसने शराब बेचने वाले व्यक्ति से उसके पिता को शराब न देने का अनुरोध किया तो उसे धमकाकर भगा दिया गया।
यह मामला केवल एक परिवार की व्यथा नहीं, बल्कि उस बड़े सामाजिक संकट की ओर इशारा करता है जिसमें गांवों तक नशे का कथित नेटवर्क पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह कानून-व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और ग्रामीण समाज की सुरक्षा के लिए अत्यंत गंभीर विषय होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी, या नशे के इस कथित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई होगी? क्षेत्र के लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे गांव और आसपास के इलाकों में विशेष अभियान चलाकर शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार ने बताया कि शिकायत प्राप्त हो गई है। मामले की जांच कराई जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाहें जांच पर हैं—क्या गांवों को नशे के इस कथित जाल से मुक्ति मिलेगी या शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाएंगी?




