बड़ा खुलासा……. देवबंद में 50 से अधिक चल रहे हैं फर्जी अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग खामोश!
बड़ा खुलासा....... देवबंद में 50 से अधिक चल रहे हैं फर्जी अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग खामोश!

बड़ा खुलासा…….
देवबंद में 50 से अधिक चल रहे हैं फर्जी अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग खामोश!
बड़ा खुलासा…….
देवबंद में 50 से अधिक चल रहे हैं फर्जी अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग खामोश!

एमबीबीएस चिकित्सकों के लगे हैं बॉर्डर पर अस्पताल में मौजूद नहीं है चिकित्सक
देवबंद। संवाददाता
देवबंद में स्वास्थ्य विभाग की नाक नीचे 50 से अधिक फर्जी अस्पताल चल रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य विभाग मौन है! परिणाम स्वरुप अब तक दर्जनों लोगों की मौत गलत उपचार के कारण हो चुकी है।
सहारनपुर का देवबंद फर्जी अस्पतालों का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां सिस्टम की नाक नीचे फर्जी अस्पताल चल रहे हैं ना कोई सुनने वाला है ना कोई कार्रवाई करने वाला है लोगों की जान से खिलवाड़ हो रही है। अब तक न जाने अनट्रेंड बिना डिग्री धारक चिकित्सकों ने कितने लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। कुछ स्थानों पर तो हालात ऐसे हैं कि वहां फायर ब्रिगेड की नाथ वालों की है और ना ही बिल्डिंग मानक के अनुसार बनाई गई है, कहा जाए तो घरों में अस्पताल चल रहे हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा डिग्री धारक एलोपैथिक इलाज कर रहे हैं आप खुद समझ सकते हैं यह कितनी बड़ी लापरवाही है। अस्पतालों के बाहर एमबीबीएस डिग्री धारक डॉक्टर के बोर्ड को लगे हैं लेकिन अंदर ना तो डॉक्टर है ना एमबीबीएस है केवल कंपाउंडरों द्वारा ऑपरेशन से लेकर अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों का उपचार किया जा रहा है। देवबंद के तल्हेड़ी चुंगी स्थित एक अस्पताल तो ऐसा है जो बिल्कुल ही चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलता नजर आ रहा है। यहां ना चिकित्सक है ना ही फायर ब्रिगेड के अग्नि सामान यंत्र और ना ही मानक के अनुसार बिल्डिंग बनी है। जिन डॉक्टर के नाम बोर्ड पर लगे हैं वह वहां बैठना तो दूर दिखते भी नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा यहां एलोपैथिक इलाज किया जाता है। इतना ही नहीं हाल ही में इस अस्पताल पर एक अधिकारी भी स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ पहुंचे थे लेकिन चढ़ापा इतना चढ़ गया यह अधिकारी ना तो कार्रवाई कर गए और मरीज को मौत के घाट उतारने का लाइसेंस इस अस्पताल को दे गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई अस्पतालों में तो गलत उपचार से लोगों की हालत तक खराब हो गई है कुछ लोगों की मौत हो चुकी है तो कुछ आज भी विकलांग होकर जीवन काट रहे हैं। कंपाउंडरों और फर्जी डिग्री धारक चिकित्सकों से जिस तरीके से यहां इलाज कराया जाता है यह गैरकानूनी है लेकिन यहां कानून की बात तो छोड़िए अस्पतालों पर निगरानी रखने तक के लिए कोई अधिकारी तक भी मौजूद नहीं है।
*देवबंद में 11 अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज, 50 से अधिक चल रहे हैं फर्जी*
आंकड़ों पर गौर करें तो देवबंद में केवल 11 अस्पताल ऐसे हैं जिनको इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से रजिस्टर माना गया है। जबकि यहां 50 से अधिक प्राइवेट अस्पताल चल रहे हैं जो ज्यादातर फर्जी हैं। स्वास्थ्य विभाग को सब कुछ पता है लेकिन हर महीने लिफाफा सुविधा शुल्क के साथ पहुंच जाता है तो फिर अधिकारी भी काला चश्मा लगा लेते हैं।
उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है की शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। किसी भी फर्जी अस्पताल को नहीं चलने दिया जाएगा
प्रशांत त्यागी




