देवबंद में स्मार्ट मीटर बने लोगों के सर का दर्द, घरों में पसरा पड़ा अंधेरा
लगातार घरों की विद्युत आपूर्ति हो रही है बंद

देवबंद में स्मार्ट मीटर बने लोगों के सर का दर्द, घरों में पसरा पड़ा अंधेरा
लगातार घरों की विद्युत आपूर्ति हो रही है बंद 
नाराज उपभोक्ताओं ने सरकार को दी चेतावनी, 2027 में भुगतने होंगे गंभीर परिणाम
देवबंद। संवाददाता
देवबंद में लगाए गए स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के घर में उजाला फैला रहे हैं। जैसे ही बिल माइनस में जाता है लखनऊ से घरों की बत्ती गुल कर दी जाती है। स्थानीय लोगों ने सरकार को चेतावनी दी है कि जैसे उनके घरों में अंधेरा हो रहा है 2027 के विधानसभा चुनाव में वह भी सरकार के जीवन में अंधेरा कायम करने का काम करेंगे।
देवबंद के जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगे हैं अब वहां उजाले की जगह अंधेरा है। ना कोई सुनने वाला है ना कोई सुनने वाला है। अधिकारियों के दफ्तरों पर उपभोक्ताओं की लाइन लग रही है मोबाइल हाथ में लिए उपभोक्ता क्या रहे हैं कि साहब हमने तो बिल भी जमा कर दिया लेकिन दो दिन बाद तक भी घर में अंधेरा है विद्युत आपूर्ति कब तक चालू हो जाएगी? यही सवाल हर एक उपभोक्ता के जुबान पर देखा गया लेकिन साहब तो गायब थे। ऑफिस बंद था। आप बेचारे कर्मचारी किसकी सुने और किसको सुनाएं अपने आप में एक अजब ही पहेली है। ज्यादातर उपभोक्ता कह रहे थे कि उन्होंने तो अभी बिल जमा किया था 8 दिन भी नहीं हुए उसके बाद फिर से विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई। अब उपभोक्ताओं को कैसे बताया जाए की यूपीसीएल स्मार्ट मीटर ऐप पर बैलेंस माइनस में जाते ही घर की विद्युत आपूर्ति भी बंद हो जाती है। अगर घर की विद्युत आपूर्ति सुचारू रूप से चालू रखती है तो उसके लिए स्मार्ट यूपीसीएल एप पर बैलेंस प्लस में रखना पड़ेगा। अगर जैसे माइंस में बैलेंस पहुंचा तो तत्काल प्रभाव से लाइन कट जाती है। अब बेचारे उपभोक्ता मोबाइल भी छोटे ले रखे हैं अब करें तो क्या करें? एक महिला तो इतने गुस्से में थी बोल रही थी कि मुख्यमंत्री जी आप कितना हमें परेशान कर रहे हैं 2027 में हम भी आपको परेशान करने का काम करेंगे। गुस्से में लाल पीली हो रही महिला अधिकारियों को भी जमकर फटकार लगाती नजर आ रही है। अब देखना है कि यह समस्या दिनों दिन बढ़ेगी या सरकार इसको लेकर कोई उपाय सोचती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
एसडीओ कार्यालय से गायब उपभोक्ता परेशान!
ऊर्जा निगम के रेलवे रोड स्थित कार्यालय पर तो हालात ऐसे हैं कि वहां मौजूद अधिकारी अपनी कुर्सी से ही गायब मिले। जब अधिकारियों से पूछा कि साहब है कहां तो जवाब था पता नहीं। अब बेचारे उपभोक्ता वहां से वापस चले जाते हैं।
प्रशांत त्यागी



