देवबंद विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण को तरजीह देगी सपा
सपा से मनोज चौधरी, कार्तिकेय राणा, माविया अली की दावेदारी

देवबंद विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण को तरजीह देगी सपासपा से मनोज चौधरी, कार्तिकेय राणा, माविया अली की दावेदारी


भाजपा के लिए गढ़ बचाना होगी चुनौती!
देवबंद। संवाददाता
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर मुख्य विपक्षी दल सपा ने चुनावी तैयारी को तेज करते हुए प्रत्याशियों की तलाश शुरू कर दी है। सहारनपुर की देवबंद विधानसभा सीट पर सपा जातीय समीकरणों के आधार पर अपना प्रत्याशी घोषित करेगी। यहां से सपा के कई दिग्गज नेता टिकट की लाइन में लगे हैं।
सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र की विधानसभा देवबंद में इस बार समाजवादी जातीय समीकरण के आधार पर अपना प्रत्याशी घोषित करेगी। 2017 से यह सीट भाजपा के पास। मुख्य विपक्षी दल सपा के लिए इस बार यहां भाजपा की फैक्ट्री रोकना बड़ी चुनौती होगा। कुंवर बृजेश सिंह देवबंद विधानसभा सीट 2017 से लगातार भाजपा से यहां विधायक हैं और वर्तमान में प्रदेश सरकार में पीडब्ल्यूडी राज्य मंत्री का बड़ा मंत्रालय संभाल रहे हैं। भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी यहां जातीय समीकरणों को धार देने में लगी है। समाजवादी पार्टी से यहां पूर्व विधायक मनोज चौधरी, पूर्व विधायक माविया अली और कार्तिकेय राणा टिकट की लाइन में है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव हाल ही में ही कह चुके हैं कि इस बार टिकट जीतने वाले प्रत्याशियों को दिया जाएगा जिसमें जातीय समीकरण मुख्य रूप से देखा जाएगा। देवबंद विधानसभा की बात करें तो जातीय समीकरण के अनुसार यहां दलित मुस्लिम के बाद त्यागी ब्राह्मण मतदाता सबसे ज्यादा है। इसके बाद राजपूत और गुर्जर मतदाता है। जिसके चलते समाजवादी यहां से जातीय समीकरण के आधार पर समीकरण बनाने में जुटी है। सियासी पंडितों का मानना है कि इस बार भाजपा के लिए यहां हैट्रिक लगाना बड़ी चुनौती होगा। क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी यहां मात्र 7 हजार के अंतर वोटो से हारी थी। समाजवादी से कार्तिकेय राणा यहां दूसरे नंबर पर रहे थे। मुस्लिम मतदाताओं में अच्छी खासी वोट लेने के बाद भी वह हिंदू मतदाताओं में वोट ना मिल पाने के कारण हार गए थे। इसके पीछे तर्क माना जा रहा था कि राजपूत समाज 90% वोट भाजपा के खेमे में गया था। हालांकि यहां बसपा से गुर्जर प्रत्याशी के रूप में राजेंद्र चौधरी चुनावी मैदान में थे लेकिन बाहरी प्रत्याशी होने के कारण उन्हें गुर्जर समाज का बहुमत में वोट नहीं मिल पाया था। ऐसे में समाजवादी बड़ी ही सूझबूझ के साथ यहां अपना प्रत्याशी तय करेगी।
*सपा की गुर्जर मतदाताओं पर नजर, सहारनपुर में दिखेगा असर?*
सूत्रों का मानना है इस बार समाजवादी सहारनपुर में दो से तीन विधानसभा सीटों पर गुर्जर प्रत्याशियों को चुनाव में उतर सकती है। जिस तरीके से गुर्जर मतदाता समाजवादी के पक्ष में लामबंद होते नजर आ रहे हैं उससे भाजपा के खेमे में हलचल जरूर पड़ रही है। देवबंद से मनोज चौधरी भी सपा से मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं तो वहीं कार्तिक राणा भी मजबूत प्रत्याशी होने का दावा कर रहे हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक माविया अली भी चुनावी मैदान में अपना दावा मजबूत करते रहे हैं।
. *… तो त्यागी ब्राह्मण समाज हो सकता है किंग मेकर*
देवबंद विधानसभा के जातीय आंकड़ों पर गौर करें तो यहां पर लगभग 1 लाख 15 हजार मुस्लिम मतदाता है। इसके बाद लगभग 40 हजार मतदाता त्यागी ब्राह्मण समाज से आते हैं। जबकि ठाकुर 27 हजार तो गुर्जर 24 हजार के करीब यहां मतदाता हैं। इससे साफ अंदाजा है इस सीट पर त्यागी ब्राह्मण समाज के मतदाता किंग मेकर की भूमिका में रहेंगे। पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा की हार के बाद त्यागी ब्राह्मण समाज के मतदाता नाराज हैं इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विरोधी घटनाओं के चलते भी समझ में नाराजगी है। जिसका सीधा असर देवबंदी नहीं सहारनपुर की सभी विधानसभा सीटों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। अगर त्यागी ब्राह्मण समाज का मतदाता सपा की ओर रुख कर लेता है तो भाजपा के लिए सहारनपुर में एक बड़े खतरे की घंटी बजाने वाली है।
*फाइनल सूची होने के बाद निकलेगा आंकड़ा*
एस आई आर सर्वेक्षण के बाद देवबंद विधानसभा की वोट का पूरा आकलन निकल पाएगा। इसके बाद ही यहां जातीय समीकरणों का आधार भी साफ हो जाएगा। लेकिन जिस तरीके से समाजवादी पूरे जिले में एक एक सीट पर जातीय समीकरण का आंकड़ा तैयार कर रही है वह भाजपा के लिए एक बड़े खतरे की घंटी है।
प्रशांत त्यागी



