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सहारनपुर से लेकर पूर्वांचल तक त्यागी ब्राह्मण भूमिहार समाज के नेता किए क्यों गए साइड लाइन?

सहारनपुर में निर्णायक होने के बावजूद भी त्यागी ब्राह्मण समाज के नेताओं को नहीं मिला सम्मान 

सहारनपुर से लेकर पूर्वांचल तक त्यागी ब्राह्मण भूमिहार समाज के नेता किए क्यों गए साइड लाइन?

 

सहारनपुर में निर्णायक होने के बावजूद भी त्यागी ब्राह्मण समाज के नेताओं को नहीं मिला सम्मान

 

राजकुमार त्यागी के बाद किसी बड़े नेता को पार्टी ने नहीं दी जिम्मेदारी

 

प्रशांत त्यागी, सहारनपुर।

 

मंगलवार को लखनऊ में ब्राह्मण समाज के विधायकों की बैठक के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। सूत्र बता रहे हैं की बैठक में सरकार में सुनवाई न होना और लगातार ब्राह्मण समाज का सरकार में लगातार कद घटना और संगठन में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई है। सूत्र बता रहे हैं कि 5 जनवरी को फिर यानी 11 दिन बाद लखनऊ में ब्राह्मण समाज के विधायक इकट्ठा होंगे।

तो बात करते हैं पश्चिम उत्तर प्रदेश की तो यहां भी त्यागी- ब्राह्मण समाज का ऐसा कोई बड़ा नेता नहीं है, जिनका कद सरकार में ऊंचा हो। पश्चिम उत्तर प्रदेश की सहारनपुर की बात करें तो यहां भाजपा के पास राघव लखनपाल शर्मा के बाद ऐसा कोई भी बड़ा नेता नहीं है। जिसका पार्टी में अच्छा खासा रुतबा हो। त्यागी ब्राह्मण भूमिहार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगेराम त्यागी बताते हैं कि 2017 के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक ब्राह्मण भूमिहार और त्यागी समाज के लोगों की अनदेखी की जा रही है। एक जमाना था जब भाजपा में पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक ब्राह्मण त्यागी समाज और भूमिहार समाज के विधायक और सांसद काफी संख्या में हुआ करते थे। लेकिन अब एक तरीके से ब्राह्मण त्यागी भूमिहार समाज को राजनीतिक रूप से कोने में खड़ा कर दिया गया है।

सहारनपुर में त्यागी ब्राह्मण समाज के संगठन की राजनीति करने वाले शिवकुमार त्यागी, एसके त्यागी, ब्राह्मण नेता रोहित कौशिक आदि ने बताया कि सहारनपुर में राजकुमार त्यागी के बाद भाजपा के अंदर जिले में भी कोई बड़ा पदाधिकारी नजर नहीं आया। सहारनपुर में गुर्जर, ठाकुर, सैनी, यहां तक की कश्यप समाज तक के नेताओं को पार्टी में अच्छी खासी जिम्मेदारी मिली हुई है। लेकिन त्यागी ब्राह्मण समाज के नेताओं की यहां भी लगातार उपेक्षा होती रही है। संगठन और सरकार से मानों त्यागी ब्राह्मण समाज को अलग ही कर दिया गया है।

 

राघव लखनपाल शर्मा को साजिश के तहत हरवाने का आरोप

 

उक्त नेताओं की माने तो लोकसभा चुनाव में जिस प्रकार से पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा को एक बड़ी रणनीति और गहरी साजिश के तहत चुनाव हारने का काम पार्टी के ही तथाकथित कुछ नेताओं ने किया यह भी किसी से छुपा नहीं है। क्योंकि वह लोग नहीं चाहते थे कि ब्राह्मण त्यागी समाज का कोई बड़ा नेता सहारनपुर में राजनीति करें।

 

संगठन और सत्ता में नहीं मिली सम्मानजनक भागेदारी

 

मेरठ की बात करें तो अश्वनी त्यागी त्यागी ब्राह्मण समाज के कोटे से विधान परिषद सदस्य हैं तो गाजियाबाद में अजीत पाल त्यागी मुरादनगर सीट से विधायक है। इसके अलावा ब्राह्मण त्यागी समाज के कोटे से कोई बड़ा ऐसा नेता नहीं है जो सरकार में मंत्री या बड़े पद पर बैठाया गया हो।

यही वजह है कि अब पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक त्यागी ब्राह्मण भूमिहार समाज एकजुट हो चला है और समाज की जनप्रतिनिधियों पर भी अब दबाव है कि वह भी समाज के लिए अपनी आवाज बुलंद करें। जिसके चलते ब्राह्मण कुटुंब के नाम से अब ब्राह्मण विधायक एकत्रित हुए हैं और अपनी बात सरकार शासन और संगठन के सामने एक जुटता के साथ रखने की तैयारी में लगे हैं। त्यागी ब्राह्मण समाज के लोगों का कहना है कि सहारनपुर में तो भाजपा को केवल त्यागी ब्राह्मण समाज के लोगों की वोट चाहिए उनके लोगों को जनप्रतिनिधि बनाया जाए या संगठन में बड़ा पद दिया जाए यह पार्टी में बैठे तथा कथित कुछ बड़े नेताओं को हजम नहीं होता है।

हालांकि भाजपा द्वारा पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा को राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनाकर कुछ डैमेज कंट्रोल करने की शुरुआत तो की है लेकिन यह रती भर है। त्यागी ब्राह्मण समाज के बड़े नेताओं से जब हमने बात की तो उनका कहना था कि 2024 में जिस प्रकार से जातीय पंचायत आयोजित की गई महापंचायत आयोजित करने की खुली छूट सरकार द्वारा दी गई यह हम अभी तक भूले नहीं है। अब जब उनका नंबर आया है तो वह डरे हुए हैं और सहमे हुए हैं कि कहीं सत्ता उनके हाथों से चली ना जाए। लेकिन त्यागी ब्राह्मण समाज सहारनपुर में मिली हार को भूलने वाला नहीं है।

 

2024 में मिली हार का बदला लेनी की तैयारी?

 

त्यागी ब्राह्मण भूमिहार समाज के नेताओं का कहना है कि संगठन तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी और बड़े नेताओं को भी साफ संदेश दिया जाएगा कि या तो 2024 के गुनहगारों के खिलाफ पार्टी कार्यवाही करें वरना 2027 में बड़ा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। त्यागी ब्राह्मण समाज अपना हक लेकर रहेगा और अपने हिस्सेदारी खुद तह करेगा।

गौरतलब हो कि देवबंद विधानसभा में भी त्यागी ब्राह्मण समाज के करीब 35 से 40 हजार मतदाता हैं। जो अपने आप में मजबूत स्थिति में है, जिसके चलते इसे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि भविष्य में देवबंद विधानसभा चुनाव में बीजेपी अन्य राजनीतिक दलों से त्यागी ब्राह्मण समाज के लोग अपनी दावेदारी ठोकते नजर आए।

 

रिपोर्ट प्रशांत त्यागी

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