वो 7000 रुपये के लिए मांगता रहा मोहलत, बदले में मिली मौत, अब उज्जवल राणा की मदद के लिए लगा लाखों रुपये का अंबार…
मुजफ्फरनगर के मृतक छात्र उज्जवल राणा की दास्तां

वो 7000 रुपये के लिए मांगता रहा मोहलत, बदले में मिली मौत, अब उज्जवल राणा की मदद के लिए लगा लाखों रुपये का अंबार…
निष्पक्ष खबर, मुजफ्फरनगर।
कभी-कभी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द यही होता है कि जो इंसान जिंदा रहते हुए हक मांगता है, उसे मरने के बाद इनाम मिल जाता है। बीए सेकंड ईयर के छात्र उज्ज्वल राणा की कहानी कुछ ऐसी ही है। वह सिर्फ सात हजार रुपये की फीस के लिए कॉलेज प्रशासन से मोहलत मांग रहा था, लेकिन बेरहम सिस्टम ने उसकी नहीं सुनी। मजबूर होकर उज्ज्वल ने आठ नवंबर को खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। मन पर लगे जख्म इतने गहरे थे कि वह जिंदगी की जंग हार गया। अब वही उज्ज्वल, जो फीस के लिए परेशान था, मिन्नतें कर रहा था, उसके ऊपर लाखों रुपये की मदद की बरसात हो रही है। सोमवार को बुढ़ाना के डीएवी कॉलेज में लाश रखकर हुई पंचायत में उज्ज्वल के लिए करीब 24 लाख रुपये की मदद का ऐलान किया गया। इस मदद के बढ़कर 50 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
इस पंचायत में प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि दोनों मौजूद रहे। एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार और एसपी देहात अतुल बंसल ने मौके पर पहुंचकर परिवार को 15 लाख रुपये की सहायता का भरोसा दिया। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने दो लाख रुपये, जबकि सपा विधायक पंकज मलिक ने पार्टी की ओर से पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की।
इनके अलावा भाकियू अराजनैतिक की ओर से गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र मलिक ने भी दो लाख रुपये देने का वादा किया। पंचायत में अन्य समाजसेवियों ने भी करीब छह लाख रुपये की सहायता का आश्वासन दिया। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल से भी संपर्क कर अतिरिक्त आर्थिक मदद का आश्वासन लिया गया है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान परिवार को और सहायता दिलाने की बात रखी जाएगी।
विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए, जिससे किसी भी विद्यार्थी को फीस न होने के कारण परीक्षा देने से रोका न जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारा हक है, कोई सौदा नहीं। वहीं, स्थानीय लोग बोले कि जब उज्ज्वल जिंदा था, तब कोई उसकी पुकार क्यों नहीं सुन सका? अब उज्ज्वल अपने गांव की मिट्टी में सो गया, तब उसकी सुनवाई हुई। क्या इंसान की कीमत सिर्फ मौत के बाद ही समझी जाएगी।




