त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी में भाजपा से आगे निकली सपा!*
सभी 49 सीटों पर संभावित जिला पंचायत प्रत्याशियों के नाम पार्टी प्रमुख को भेजने की तैयारी

*त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी में भाजपा से आगे निकली सपा!*
सभी 49 सीटों पर संभावित जिला पंचायत प्रत्याशियों के नाम पार्टी प्रमुख को भेजने की तैयारी
पोलिंग बूथ से लेकर जिला संगठन तक भाजपा हुई फिसडी साबित
*निष्पक्ष खबर ब्यूरो, सहारनपुर।*
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले वर्ष 2026 के शुरुआत के महीने में होंगे। लेकिन प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा पंचायत चुनाव की तैयारी में पिछड़ती नजर आ रही है। जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी सपा ने उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों से जिला पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों के नाम तक जिला अध्यक्ष के माध्यम से मंगा लिए हैं। अकेले सहारनपुर से ही 49 वार्ड से सभी प्रत्याशियों के नाम पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को भेजे जाने की सूचना है। लेकिन सहारनपुर में भाजपा संगठन पंचायत चुनाव की तैयारी में पिछड़ता नजर आ रहा है। वजह है अब तक भी कई मंडल पर अध्यक्षों की घोषणा न होना और जिला संगठन का निष्क्रिय हो जाना। ज्ञात रहे की लोकसभा चुनाव में भी सहारनपुर में ही अकेले 150 मतदान केदो पर भाजपा के एजेंट तक भी नहीं बन पाए थे परिणाम स्वरुप सत्ता में रहते हुए भी भाजपा को लोकसभा चुनाव में हार मिली। हाल में ही पार्टी संगठन द्वारा कराए गए गोपनीय सर्वे में खुलासा हुआ था कि पार्टी के ज्यादातर अध्यक्ष या मंडल अध्यक्ष ठेकेदारी और प्रॉपर्टी के काम में जुटे हैं। जिसके चलते पार्टी के संगठन के समस्त काम प्रभावित पड़े हैं और पंचायत चुनाव की तैयारी में भी सप्ताह में रहते हुए भी भाजपा काफी पीछे नजर आ रही है। उधर सपा ने पोलिंग बूथ से लेकर जमीनी स्तर पर मजबूत तैयारी की है। सूत्रों का दावा है कि सभी 49 जिला पंचायत की सीटों पर पार्टी ने प्रत्याशियों के नाम तक भी मंगा लिए हैं। संभावित प्रत्याशियों द्वारा जिला अध्यक्ष के माध्यम से पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अपने दावेदारी के कागजात भेजे हैं। जिसमें प्रत्याशियों का जीवन काल से लेकर पार्टी के लिए किए गए कार्यों का विवरण भी है।
*सहारनपुर में नहीं हो सका नई जिला अध्यक्ष का ऐलान*
जिस तरीके से सहारनपुर में भाजपा दो गुटों में विभाजित हो चुकी है उससे लग रहा है कि शायद इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान हो। नए संगठन का ऐलान न होना और पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी इस बार पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक बड़ा नुकसान करने जा रही है।
*सहारनपुर मंडल में दो गुटों में बटी भाजपा, पंचायत चुनाव पर पडेगा सीधा असर*
2017 से पहले भाजपा संगठन जिस तरीके से जमीन स्तर पर काम करता था वह सत्ता मिलने के बाद नजर नहीं आता। सहारनपुर की बात करें तो यहां जिस प्रकार से लोकसभा चुनाव में पार्टी को हार मिली उसने संगठन से लेकर पार्टी के जनप्रतिनिधियों तक सवाल खड़े कर दिए थे। आरोप लगे थे की पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी के चलते ही लोकसभा सीट बीजेपी सहारनपुर से हारी है। सहारनपुर से लेकर शामली और शामली से लेकर मुजफ्फरनगर इस प्रकार भाजपा दिल्ली और लखनऊ की राजनीति के बीच दो गुटों में बंट गई है वह भविष्य के लिए भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं है।
*गुर्जर और त्यागी ब्राह्मण समाज के मतदाताओं की नाराजगी भाजपा को पड़ सकती है भारी*
पंचायत चुनाव में इस बार भाजपा के सामने गुर्जर और त्यागी ब्राह्मण समाज की पार्टी से नाराजगी भी बड़ी परेशानी का सबब बन रही है। दावा किया जा रहा है कि इस बार गुर्जर समाज और त्यागी ब्राह्मण समाज के मतदाता भाजपा के पहले से छिटक सकते हैं। क्योंकि जिस प्रकार से जिला संगठन दोनों ही समाज के नेताओं को सम्मान नहीं दे पाया और गुटबाजी का शिकार हो गया उससे साफ-साफ नजर आ रहा है कि इस बार पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
रिपोर्ट प्रशांत त्यागी




